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#सत_भक्ति_संदेश ##santrampalji maharaj #🙏गुरु महिमा😇
सत_भक्ति_संदेश - गरीब, अभूमी आदिहे, जाका नार्ही अंत। अकळ दिळही अंदरदेव हे, निर्मलनिरगुन र्तंत Il सरलार्थ- (अविनाशी जिसका काल न हो) , अकल भूमि = ऊपर के चारों लोक जो अमर धरती है , वह सनातन है। उसमें निवास करने वाला निर्मल निर्गुण (अव्यक्त) देव (परमेश्वर) जो तंत यानि सब देवों का सार प्रभु यानि कुल का मालिक है। वह हमारे दिल में बसा है। Satlok Ashram Betull @Satlok-Ashram Betul @SatlokBetul_ गरीब, अभूमी आदिहे, जाका नार्ही अंत। अकळ दिळही अंदरदेव हे, निर्मलनिरगुन र्तंत Il सरलार्थ- (अविनाशी जिसका काल न हो) , अकल भूमि = ऊपर के चारों लोक जो अमर धरती है , वह सनातन है। उसमें निवास करने वाला निर्मल निर्गुण (अव्यक्त) देव (परमेश्वर) जो तंत यानि सब देवों का सार प्रभु यानि कुल का मालिक है। वह हमारे दिल में बसा है। Satlok Ashram Betull @Satlok-Ashram Betul @SatlokBetul_ - ShareChat