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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - जैसा अन्न वैसा मन जैसे भोजन के संबंध में चार नियम हैं 1. থুভু কমান্ত ম মরহীষা যামা ৪্ী पदार्थों से बना हो 2. মাণিক स्मृति में पकाया हो ३. भगवान की ४. भगवान को अर्पण कर ( भोग लगाकर ) खाया जाए इसी प्रकार अन्य पांच नियम भी अनिवार्य हैं १. शारीरिक स्वास्थ्य के अनुकूल २. सुपाच्य ३. निर्धारित समय पर जितना, अधिक नहीं ४० आवश्यकता ५. अनासक्त भाव से ( लोभ से नहीं ) आवश्यकता से अधिक भोजन, गरिष्ठ भोजन आलस्य, सुस्ती, अकर्मण्यता और अनेकानेक बीमारियों को निमंत्रण देकर हमें इंद्रियों का गुलाम बना देता है। योगीजनों या साधकों को अल्प आहार अनासक्त भाव से करना चाहिए तभी वे भोजन के साथ भजन ( ईश्वर चिंतन ) कर सकते हैं। Brahmakumaris जैसा अन्न वैसा मन जैसे भोजन के संबंध में चार नियम हैं 1. থুভু কমান্ত ম মরহীষা যামা ৪্ী पदार्थों से बना हो 2. মাণিক स्मृति में पकाया हो ३. भगवान की ४. भगवान को अर्पण कर ( भोग लगाकर ) खाया जाए इसी प्रकार अन्य पांच नियम भी अनिवार्य हैं १. शारीरिक स्वास्थ्य के अनुकूल २. सुपाच्य ३. निर्धारित समय पर जितना, अधिक नहीं ४० आवश्यकता ५. अनासक्त भाव से ( लोभ से नहीं ) आवश्यकता से अधिक भोजन, गरिष्ठ भोजन आलस्य, सुस्ती, अकर्मण्यता और अनेकानेक बीमारियों को निमंत्रण देकर हमें इंद्रियों का गुलाम बना देता है। योगीजनों या साधकों को अल्प आहार अनासक्त भाव से करना चाहिए तभी वे भोजन के साथ भजन ( ईश्वर चिंतन ) कर सकते हैं। Brahmakumaris - ShareChat