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उमंग सुल्लेरे जी पनवाड़ी नेहरू इण्टर कालेज के पूर्व छात्र थे और उनकी रचना कालेज की प्रथम वार्षिक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। यह जानकारी उनके लेखकीय जीवन की एक महत्वपूर्ण बात है ¹। #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🌐 राष्ट्रीय अपडेट क्या आपको उमंग सुल्लेरे जी की और जानकारी चाहिए या उनकी अन्य रचनाएं पढ़नी हैं?
✍मेरे पसंदीदा लेखक - कविता भीषण हथकड़ी बेड़िया विद्रोही हम बागी जंजीरें सब सोने की होते बारी है, कान्हा होने की हम तोड़ चुके  इनको क्या प्रहरी 4 #RT %6 4 कंसों का लाखों पहरा हो ये सभी पृष्ट मिट जायेंगे, जो रचे गये विध्वंसों  ٦ की संध्या है ஈதன 481 की कंस कहानी है कलयुग , पुरानी নমুনন ন নান ले लो गोदी में सब मुकुन्द " है पार्थ कृष्ण दोनों , हममें अब न होना युद्ध विरत् ये देह बन गया लाक्षाग्रह, जीवन ही है एक महाभारत हे कृष्ण कन्हैया द्वापर में ৭ বব্ধ वकासुर था उस युग कलिका सुर का है येयुग  औ धवला सुर भी अनेक  हे गंगा सुत् न शीश झुके जो द्रुपद सुता सम्मुख आये " गांड़ीव बनो टंकार भरो अब अन्धा न सत्ता पायें। सुल्लेरे उमग भू॰पू॰ छात्र (56 ) कविता भीषण हथकड़ी बेड़िया विद्रोही हम बागी जंजीरें सब सोने की होते बारी है, कान्हा होने की हम तोड़ चुके  इनको क्या प्रहरी 4 #RT %6 4 कंसों का लाखों पहरा हो ये सभी पृष्ट मिट जायेंगे, जो रचे गये विध्वंसों  ٦ की संध्या है ஈதன 481 की कंस कहानी है कलयुग , पुरानी নমুনন ন নান ले लो गोदी में सब मुकुन्द " है पार्थ कृष्ण दोनों , हममें अब न होना युद्ध विरत् ये देह बन गया लाक्षाग्रह, जीवन ही है एक महाभारत हे कृष्ण कन्हैया द्वापर में ৭ বব্ধ वकासुर था उस युग कलिका सुर का है येयुग  औ धवला सुर भी अनेक  हे गंगा सुत् न शीश झुके जो द्रुपद सुता सम्मुख आये " गांड़ीव बनो टंकार भरो अब अन्धा न सत्ता पायें। सुल्लेरे उमग भू॰पू॰ छात्र (56 ) - ShareChat