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#મારી ગઝલ
મારી ગઝલ - कुछ तो है जो खटकता है दिल में दुआ मांगे या न मांगे ये खटकता है दिल में हम तो शब्र कर के बैठ गए जालिम खत्म न हुआ ये खटकता है दिल में खुदा मिलता है कोई कहता है ढूंढने से हमको मिला नहीं जो वो खटकता है दिल में वो कहानी है नबी ओ अंबियाओ की हम काशीर नहीं ये खटकता है दिल में लोग आंखों में हमारी मुफलिसी देखे अज्र ए मेहनत नमिलेये खेटकता है दिल में हे नामुमकिन कृछ भी नहीं वो जो कहते किस्मत हाथ में नही ये खटकतान दिल में मैं अंधेरों सें घबराता नहीं मेरे दौर्त जुगनू सोए हैं हुए हैं ये खिटकता है दिल " जात ए अल्लाह से ःवौकिफ है ज़माना सारा सजदे भी न हो ये खटकता है दिल में हमसे हुसैन मुल्ला अल्ताफ कुछ तो है जो खटकता है दिल में दुआ मांगे या न मांगे ये खटकता है दिल में हम तो शब्र कर के बैठ गए जालिम खत्म न हुआ ये खटकता है दिल में खुदा मिलता है कोई कहता है ढूंढने से हमको मिला नहीं जो वो खटकता है दिल में वो कहानी है नबी ओ अंबियाओ की हम काशीर नहीं ये खटकता है दिल में लोग आंखों में हमारी मुफलिसी देखे अज्र ए मेहनत नमिलेये खेटकता है दिल में हे नामुमकिन कृछ भी नहीं वो जो कहते किस्मत हाथ में नही ये खटकतान दिल में मैं अंधेरों सें घबराता नहीं मेरे दौर्त जुगनू सोए हैं हुए हैं ये खिटकता है दिल " जात ए अल्लाह से ःवौकिफ है ज़माना सारा सजदे भी न हो ये खटकता है दिल में हमसे हुसैन मुल्ला अल्ताफ - ShareChat