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#सतभक्ति_के_चमत्कारी_लाभ
. कबीर साहिब की महिमा
गरीब~अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदी छोड कहाय।
सो तौ एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।।
अनंत कोटि ब्रम्हाण्ड मे केवलं एक परमात्मा कबीर साहिब जी ही बंदी छोड़ हैं। अनंत करोड़ ब्रह्माण्डों में बन्दी छोड़ के नाम से प्रसिद्ध हैं। बन्दीछोड़ का अर्थ है कैदी को कारागार से छुड़ाने वाला। हम सब जीव काल ज्योति निरंजन की कारागार में कैदी हैं। इस बंदीगृह से केवल कबीर परमात्मा की छुड़ा सकते हैं इसलिए सब ब्रह्माण्डों में परमात्मा कबीर जी एकमात्र बन्दीछोड़ हैं। केवल परमात्मा कबीर साहिब जी ही एकमात्र हैं जिनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। हर बार स्वम शिशु रूप धर कर प्रगट होकर एक जीवन पृथ्वी पर बिताते है।
गरीब ~बंधे को बंधा मिले, छूटे कौन उपाय।
कर सेवा निरबंध की, पल में लेत छुड़ाय।।
गरीब~चौरासी बंधन कटे,कीनी कलप कबीर।
भवर चतुरदश लोक सब, टूटे जम जंजीर।।
जो परमात्मा कबीर जी की शरण में आ जाते हैं, कबीर परमेश्वर जी की कृपा से चौरासी लाख योनियों में जाने वाले बंधन कट जाते हैं। कर्मों के कारण बंधन होता है। वे पाप कर्म परमात्मा कबीर जी की कृपा से नष्ट हो जाते हैं। सतनाम के जाप से पाप नाश होते हैं।
गरीब~शब्द स्वरूप शाहेब धनी, शब्द सिंध सब मांहि।
बाहर भीतर रमि रह्या, जहाँ तहां सब ठांहिं।।
गरीब~जल थल पथ्वी गगन में,बाहर भीतर एक।
पूरणब्रह्म कबीर हैं,अबिगत पुरूष अलेख।।
परमात्मा कबीर साहिब जी ही शब्द स्वरूपी राम है। शब्द कभी खण्ड नही होता अविनाशी रूप हैं, उसी तरह कबीर साहिब जी अविनाशी है । उनकी वचन शक्ति समुद्र की तरह अथाह है। जीव एक तुम्बे की तरह है जो समुद्र में पड़ा है। उसके अंदर भी जल बाहर भी जल होता है। ऐसे परमात्मा कबीर जी की शक्ति के अंदर सब ब्रह्माण्डों के जीव हैं। परमात्मा इस प्रकार सर्वव्यापक कहा जाता है। कबीर जी पूर्णब्रह्म हैं। दिव्य अवर्णननीय परमेश्वर है।
गरीब~सेवक होय करि ऊतरे, इस पथ्वी के मांही।
जीव उधारन जगतगुरु, बार बार बलि जांहि।।
परमात्मा कबीर साहिब जी वेदों में बताए उनकी महिमा के अनुरूप लीला करते हैं। ऋग्वेद मण्डल नं.9 सूक्त 82 मंत्र 1.2, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26-27, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 54 मंत्रा 3, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 94 मंत्र 1, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 95 मंत्र 2, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 16.20 आदि-आदि अनेकों मंत्रों में कहा है कि परमात्मा कबीर साहिब जी परमेश्वर है जो आकाश में सबसे ऊपर वाले स्थान पर बैठा है।
वहाँ से गति करके इस लोक मे आता है। अच्छी आत्माओं को मिलता है। उनको उपदेश देता है। तत्त्वज्ञान का प्रचार अपनी (कविर्गिर्भिः) कबीर वाणी द्वारा (काव्येन) कवित्व से यानि कवियों की तरह साखी, शब्द, चौपाईयों द्वारा बोल-बोलकर करता है। जिस कारण से (कविनाम पदवी) कवियों में से प्रसिद्ध कवि की उपाधि प्राप्त करता है।
जैसे परमात्मा कबीर जी को ‘‘कवि’’ भी कहा जाता है। परमात्मा कबीर जी पृथ्वी पर कवियों की तरह आचरण करता हुआ विचरण करता है। परमात्मा कबीर जी अपनी वाणी बोलकर भक्ति करने की प्रेरणा करता है। भक्ति के गुप्त नाम का आविष्कार करता है। परमात्मा कबीर साहिब जी की शक्तियों सर्व व्यापक है। कबीर साहिब जी ही सबके मूल आधार हैं, वेद आपका ही प्रतिपादन करते हैं। हम आपको बारम्बार अष्टांग दंडवत प्रणाम करते हैं।
हे आत्मरूप! परमपिता परमात्मा कबीर साहिब जी आपकी महिमा और आपके निज धाम सतलोक से चल कर आने की गवाही वेद देते हैं। सूक्ष्मवेद आपकी महिमा का गुणगान करते हैं। परंतु अज्ञानवश हम जीव आपको पहचान नहीं पाते और असंख्यो दुखो को झेलते हैं।
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