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#आज के चर्चित मुद्दे ##राजनितिक चर्चा
आज के चर्चित मुद्दे - ने कहा जब #चंद्रशेखर आजाद था #सावरकर #हराम_ खोर है #भगत_ सिंह और अन्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई थी, दल के पास पैसे का भी संकट था, ऐसे में चन्द्रशेखर आजाद ने आर्थिक मदद की में उन्हे (यशपाल) को सावरकर के पास সাথা पूना भेजा। #यशपाल ने लिखा है कि जब वह पहुंचे तो उन्हे ढाई घंटे उनके निवास स्थान पर इन्तजार करना पडा क्योंकि सावरकर अन्दर पूजा में व्यस्त थे। जब वह पूजा करके बाहर निकले तो यशपाल ने अपना परिचय देते हुये आजाद का संदेश दिया। यशपाल के अनुसार सावरकर ने कुछ देर विचारकर कहा कि #अंग्रेजों के #खिलाफ मे मै आप लोगों लडाई की कोई मदद नहीं कर सकता , हां ! अगर तुम लोग #मोहम्मद_ अली जिन्ना को मार देने का हम तुम् लोगों के लिये एक के वादा करो तो तीन विदेशी रिवाल्वर दे सकते हैं। बजाय जब यशपाल ने लौटकर यह वृतांत #आजाद जी ने गाली देते हुये को सुनाया तो #पंडित कहा कि " #हम #क्रान्तिकारी हैं और इस हरामखोर नें हमे #किराये का #हत्यारा समझ 98" सावरकर सम्बंधित इस घटना का उल्लेख भगतसिंह के क्रन्तिकारी साथी और प्रसिद्ध उपन्यासकार यशपाल ने अपनी पुस्तक आत्मकथा "सिंहावलोकन " (१९५२) में किया है। यशपाल की किताब पढ़कर सावरकर के गौमूत्र " सपोलो को चुल्लू भर में नाक रगड़ के प्राणत्याग के अपने नागनाथ के पास प्रस्थान कर जाना चाहिए ने कहा जब #चंद्रशेखर आजाद था #सावरकर #हराम_ खोर है #भगत_ सिंह और अन्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई थी, दल के पास पैसे का भी संकट था, ऐसे में चन्द्रशेखर आजाद ने आर्थिक मदद की में उन्हे (यशपाल) को सावरकर के पास সাথা पूना भेजा। #यशपाल ने लिखा है कि जब वह पहुंचे तो उन्हे ढाई घंटे उनके निवास स्थान पर इन्तजार करना पडा क्योंकि सावरकर अन्दर पूजा में व्यस्त थे। जब वह पूजा करके बाहर निकले तो यशपाल ने अपना परिचय देते हुये आजाद का संदेश दिया। यशपाल के अनुसार सावरकर ने कुछ देर विचारकर कहा कि #अंग्रेजों के #खिलाफ मे मै आप लोगों लडाई की कोई मदद नहीं कर सकता , हां ! अगर तुम लोग #मोहम्मद_ अली जिन्ना को मार देने का हम तुम् लोगों के लिये एक के वादा करो तो तीन विदेशी रिवाल्वर दे सकते हैं। बजाय जब यशपाल ने लौटकर यह वृतांत #आजाद जी ने गाली देते हुये को सुनाया तो #पंडित कहा कि " #हम #क्रान्तिकारी हैं और इस हरामखोर नें हमे #किराये का #हत्यारा समझ 98" सावरकर सम्बंधित इस घटना का उल्लेख भगतसिंह के क्रन्तिकारी साथी और प्रसिद्ध उपन्यासकार यशपाल ने अपनी पुस्तक आत्मकथा "सिंहावलोकन " (१९५२) में किया है। यशपाल की किताब पढ़कर सावरकर के गौमूत्र " सपोलो को चुल्लू भर में नाक रगड़ के प्राणत्याग के अपने नागनाथ के पास प्रस्थान कर जाना चाहिए - ShareChat