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#😭ರಾಮಾಯಣ ಧಾರಾವಾಹಿಯ ಖ್ಯಾತ ನಿರ್ಮಾಪಕ ನಿಧನ💔
😭ರಾಮಾಯಣ ಧಾರಾವಾಹಿಯ ಖ್ಯಾತ ನಿರ್ಮಾಪಕ ನಿಧನ💔 - व्यक्तित्व रामानंद सागर पहुंचाई घर-्घर तक IHIUI की कहानी भारतवर्ष और हिंदू धर्म- संस्कृति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण महाकाव्य और पवित्र  रामायण बहुत ही ग्रंथ है। भारत में जबन्जब रामायण की बात होती है तो मनन्मस्तिष्क में रामानंद सागर की छवि उभरती है जिन्होंने इसकी कहानी को घर-्घर तक पहुंचा दिया। ८० के दशक में जो रामायण धारावाहिक उन्होंने रूपहले पर्दे पर उतारा, उसे दर्शक आज भी खूब पसंद करते हैं। इस धाराचाहिक के हर कलाकार अपने २९ दिसंबर १९१७, मृत्य 12 ferat 2005 जनप fag किरदार की वजह से हमेशा के हो गए अमर.. ७ में दूरदर्शन पर रामायण धारावाहिक देकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन-्जन तक भगवान श्रीराम की ಕrೆaa 1987 शुरू हुआ तो यह देश की धड़कन बन मर्यादा, आदर्श और शिक्षाओं को पहुंचाने वाले रामानंद सागर ने का प्रसारण गया। लोगों को बेसब्री से इसका इंतजार रहता था। इस धारावाहिक के क्षेत्र में कदम रखने से पहले चरस, जलते बदन धारावाहिक के दौरान लोग इतने उत्साहित रहते थे कि रविवार और रोमांस जैसी एक से एक बेहतरीन फिल्में भी बनाईं। उनके की सुबह देश की सड़कें वीरान हो जाती थी। राम-्सीता के द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध टीवी धारावाहिकों में विक्रम और बेताल किरदार स्क्रीन पर आते ही लोग श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़ लेते थे। इस दादा-्दादी की कहानियां, रामायण, कृष्णा , अलिफ लैला और जय धारावाहिक को बनाने वाले व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि रामानंद गंगा मैया जैसे बेहद लोकप्रिय धारावाहिक शामिल हैं । थे। उन्होंने न सिर्फ इसका निर्देशन किया बल्कि उन्हीं को वर्ष २०२० में देश में कोरोना वायरस को स्थिति और २१ दिन के सागर लॉकडाउन के दौरान घर में रहने वाले लोगों के हितों को ध्यान में प्रोडक्शन कंपनी सागर आर्ट ने इसका निर्माण भी किया था। रामायण  रखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती ने २८ मार्च  की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  पूरे होने के बाद दर्शकों ने लव-्कुश की कहानी  इसके ७८ एपिसोड 1 २०२० से रामानंद सागर के रामायण धारावाहिक का दूरदर्शन पर एक बनाने को मांग को। फिर प्रसारित करने का निर्णय लिया था। ऐसा इस धारावाहिक না में लोगों की भारी रुचि और इसके दोबारा प्रसारण की जनता की मांग  २१ दिसंबर १९१७ को लाहौर में जन्मे बच्चे का नाम मां ने चंद्रमौली रखा में ही बच्चे ने अपनी मां को खो दिया। को ध्यान में रखते हुए किया गया था। रामायण के आते ही इस शो बाल्यावस्था ने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता को साबित कर दिखाया | जैसे ही मां के निधन के कारण जब नानी ने गोद लिया तो उस बच्चे का नाम यह शो शुरू चंद्रमौली चोपड़ा को दुनिया  हुआ इसकी टीआरपी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बदलकर रामानंद रख दिया इस तरह रामानंद सागर के नाम से जानने लगी । उनका बचपन सामान्य नहीं क्षेत्र में योगदान के लिए रामानंद सागर को साल २००० कला क का बहुत शौक था जिसमें लगातार व्यवधान आता  में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। भारतीय रहा। उन्हें पढ़ने  से जुड़ गए और सफलता के नित संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को और बढ़ाने के प्रतीक रहे रहा। बाद में वह फिल्मी दुनिया सहेजने रामायण को टीवी धारावाहिक का स्वरूप रामानंद सागर का १२ दिसंबर २००५ को निधन हो गया। - नए आयाम गढत रह নাচটিযা মবানাৎ १६ - ३१ दिसंवर २०२५ व्यक्तित्व रामानंद सागर पहुंचाई घर-्घर तक IHIUI की कहानी भारतवर्ष और हिंदू धर्म- संस्कृति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण महाकाव्य और पवित्र  रामायण बहुत ही ग्रंथ है। भारत में जबन्जब रामायण की बात होती है तो मनन्मस्तिष्क में रामानंद सागर की छवि उभरती है जिन्होंने इसकी कहानी को घर-्घर तक पहुंचा दिया। ८० के दशक में जो रामायण धारावाहिक उन्होंने रूपहले पर्दे पर उतारा, उसे दर्शक आज भी खूब पसंद करते हैं। इस धाराचाहिक के हर कलाकार अपने २९ दिसंबर १९१७, मृत्य 12 ferat 2005 जनप fag किरदार की वजह से हमेशा के हो गए अमर.. ७ में दूरदर्शन पर रामायण धारावाहिक देकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन-्जन तक भगवान श्रीराम की ಕrೆaa 1987 शुरू हुआ तो यह देश की धड़कन बन मर्यादा, आदर्श और शिक्षाओं को पहुंचाने वाले रामानंद सागर ने का प्रसारण गया। लोगों को बेसब्री से इसका इंतजार रहता था। इस धारावाहिक के क्षेत्र में कदम रखने से पहले चरस, जलते बदन धारावाहिक के दौरान लोग इतने उत्साहित रहते थे कि रविवार और रोमांस जैसी एक से एक बेहतरीन फिल्में भी बनाईं। उनके की सुबह देश की सड़कें वीरान हो जाती थी। राम-्सीता के द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध टीवी धारावाहिकों में विक्रम और बेताल किरदार स्क्रीन पर आते ही लोग श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़ लेते थे। इस दादा-्दादी की कहानियां, रामायण, कृष्णा , अलिफ लैला और जय धारावाहिक को बनाने वाले व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि रामानंद गंगा मैया जैसे बेहद लोकप्रिय धारावाहिक शामिल हैं । थे। उन्होंने न सिर्फ इसका निर्देशन किया बल्कि उन्हीं को वर्ष २०२० में देश में कोरोना वायरस को स्थिति और २१ दिन के सागर लॉकडाउन के दौरान घर में रहने वाले लोगों के हितों को ध्यान में प्रोडक्शन कंपनी सागर आर्ट ने इसका निर्माण भी किया था। रामायण  रखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती ने २८ मार्च  की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  पूरे होने के बाद दर्शकों ने लव-्कुश की कहानी  इसके ७८ एपिसोड 1 २०२० से रामानंद सागर के रामायण धारावाहिक का दूरदर्शन पर एक बनाने को मांग को। फिर प्रसारित करने का निर्णय लिया था। ऐसा इस धारावाहिक না में लोगों की भारी रुचि और इसके दोबारा प्रसारण की जनता की मांग  २१ दिसंबर १९१७ को लाहौर में जन्मे बच्चे का नाम मां ने चंद्रमौली रखा में ही बच्चे ने अपनी मां को खो दिया। को ध्यान में रखते हुए किया गया था। रामायण के आते ही इस शो बाल्यावस्था ने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता को साबित कर दिखाया | जैसे ही मां के निधन के कारण जब नानी ने गोद लिया तो उस बच्चे का नाम यह शो शुरू चंद्रमौली चोपड़ा को दुनिया  हुआ इसकी टीआरपी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बदलकर रामानंद रख दिया इस तरह रामानंद सागर के नाम से जानने लगी । उनका बचपन सामान्य नहीं क्षेत्र में योगदान के लिए रामानंद सागर को साल २००० कला क का बहुत शौक था जिसमें लगातार व्यवधान आता  में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। भारतीय रहा। उन्हें पढ़ने  से जुड़ गए और सफलता के नित संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को और बढ़ाने के प्रतीक रहे रहा। बाद में वह फिल्मी दुनिया सहेजने रामायण को टीवी धारावाहिक का स्वरूप रामानंद सागर का १२ दिसंबर २००५ को निधन हो गया। - नए आयाम गढत रह নাচটিযা মবানাৎ १६ - ३१ दिसंवर २०२५ - ShareChat