ShareChat
click to see wallet page
search
#✝यीशु वचन
✝यीशु वचन - प्रभु कहता है १.   किसी मण्डली की या उसके अगुवे की बुराई करना आसान है,पर जब मैं तुझे उसी स्थान पर खड़ा आएगी - करूँतो भार और जिम्मेदारी समझ में (याकूब 3:१) जो बाहर से दिखता है,वह पूरा सत्य नहीं;अंदर 2. संघर्ष, प्रार्थना और बलिदान होता है (2 कुरिन्थियों ११:२८) ३.  न्याय करने से पहले नम्रता सीख,क्योंकि हर सेवक मेरे सामने उत्तरदायी है (रोमियों १४:४ ) नेतृत्व करना और ४. आलोचना करना सरल है,पर लोगों का बोझ उठाना आत्मिक परिपक्वता मांगता (गलातियों ६:२) है रख मैं तुझे आलोचक नहीं बल्कि सहायक 5 যাৎ (इफिसियों और उठाने वाला बनाना चाहता हूँ 4:29) प्रभु कहता है १.   किसी मण्डली की या उसके अगुवे की बुराई करना आसान है,पर जब मैं तुझे उसी स्थान पर खड़ा आएगी - करूँतो भार और जिम्मेदारी समझ में (याकूब 3:१) जो बाहर से दिखता है,वह पूरा सत्य नहीं;अंदर 2. संघर्ष, प्रार्थना और बलिदान होता है (2 कुरिन्थियों ११:२८) ३.  न्याय करने से पहले नम्रता सीख,क्योंकि हर सेवक मेरे सामने उत्तरदायी है (रोमियों १४:४ ) नेतृत्व करना और ४. आलोचना करना सरल है,पर लोगों का बोझ उठाना आत्मिक परिपक्वता मांगता (गलातियों ६:२) है रख मैं तुझे आलोचक नहीं बल्कि सहायक 5 যাৎ (इफिसियों और उठाने वाला बनाना चाहता हूँ 4:29) - ShareChat