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#" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " #💞Heart touching शायरी✍️ #🥰 इमोशनल पल
" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " - हर एक गमों को समेट कर मुस्कुरा रहा हूं॰ जिंदादिली से अपनी जिन्दगी जी रहा हूं। कहने को तो लाख बहाने है जिन्दगी के, ये क्या कम है जो हर ज़ख्म में भी मुस्कुरा रहा हूं। ज़माने के फिक्र को दिल से निकाल फेंका, अल्लाह से बेहतर कोई नही बेहतर करने वाला। करके किनारे हर सितम को, हौसलों का परवान चढ़ाया। जो भी रहा दौर जिन्दगी के सफ़र में , हिम्मत से ही अपनी जिन्दगी को चमकाया शिकायत तो रहेंगे ता उम्र सभी को, शिकायत ने ही तो मुझे शुरखुरु बनाया। जिसकी जितनी समझ है वो उतना ही समझेगा , ये नादान इन्सान ने चांद में भी दाग़ बताया। फिक्र करने वालों की बहुत लम्बी फिरहिस्त है, आप मानो या ना मानो ये सब फिरहिस्त तक ही महदूद है। ভাহক্নাল যীথান हर एक गमों को समेट कर मुस्कुरा रहा हूं॰ जिंदादिली से अपनी जिन्दगी जी रहा हूं। कहने को तो लाख बहाने है जिन्दगी के, ये क्या कम है जो हर ज़ख्म में भी मुस्कुरा रहा हूं। ज़माने के फिक्र को दिल से निकाल फेंका, अल्लाह से बेहतर कोई नही बेहतर करने वाला। करके किनारे हर सितम को, हौसलों का परवान चढ़ाया। जो भी रहा दौर जिन्दगी के सफ़र में , हिम्मत से ही अपनी जिन्दगी को चमकाया शिकायत तो रहेंगे ता उम्र सभी को, शिकायत ने ही तो मुझे शुरखुरु बनाया। जिसकी जितनी समझ है वो उतना ही समझेगा , ये नादान इन्सान ने चांद में भी दाग़ बताया। फिक्र करने वालों की बहुत लम्बी फिरहिस्त है, आप मानो या ना मानो ये सब फिरहिस्त तक ही महदूद है। ভাহক্নাল যীথান - ShareChat