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#✍गुलजारांचे साहित्य #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
✍गुलजारांचे साहित्य - खत्म हो रही है मेरी नादानियां में अब समझदार बन रहा हु कुछ ना, मिलने पर रोया करता था अब सब कुछ खोकर भी मुस्कुरा रहा हु! ! !... खत्म हो रही है मेरी नादानियां में अब समझदार बन रहा हु कुछ ना, मिलने पर रोया करता था अब सब कुछ खोकर भी मुस्कुरा रहा हु! ! !... - ShareChat