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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - सारे जलते प्रश्न खो गए, ठन्ड़े-बुझे जवाबों में। आने वाली क्रंती लिखेंगी किसका नाम किताबों में? हर सफ़दपोशी में मिलती घनी साँवली वीरानी, शक़्ले बिल्कुल सा़फ़ दीखती हँसती हुई नक़ाबों में। में कितनी सोन्धी सोन्धी ख़ुशबू है, मिट्टी के पुतलों लेकिन ऐसी गंध कहाँ है, चान्दी मढ़े ख़िताबों में। नहीं यों एक रियासत, मगर सियासत बाकी है, जोड़ ्तोड़ की होड़ लगी है जमकर नए नवाबों में। मिलना एक ज़़रूरत है तो आओ सचमुच मिल जाएँ, चौराहे पर गले मिलेंगे, नहीं मिलेंगे ख़्वाबो में। सारे जलते प्रश्न खो गए, ठन्ड़े-बुझे जवाबों में। आने वाली क्रंती लिखेंगी किसका नाम किताबों में? हर सफ़दपोशी में मिलती घनी साँवली वीरानी, शक़्ले बिल्कुल सा़फ़ दीखती हँसती हुई नक़ाबों में। में कितनी सोन्धी सोन्धी ख़ुशबू है, मिट्टी के पुतलों लेकिन ऐसी गंध कहाँ है, चान्दी मढ़े ख़िताबों में। नहीं यों एक रियासत, मगर सियासत बाकी है, जोड़ ्तोड़ की होड़ लगी है जमकर नए नवाबों में। मिलना एक ज़़रूरत है तो आओ सचमुच मिल जाएँ, चौराहे पर गले मिलेंगे, नहीं मिलेंगे ख़्वाबो में। - ShareChat