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#om shanti brahmakumari
om shanti   brahmakumari - मैं भगवान के बगीचे का Rl 8 पुष्प हू रूहानी  ष्यमान8 योगाभ्यास   पुण हूँ | फाउण्ठेन के समान याबा से निकलती ज्ञान, गुण चा मैें शिवयाया के बगीचे का रूहानी शक्तियों की किरणें निरंतर मुझे सींच रही हें जिससे मेरे अंदर दिव्यगुणों की खुशबू बढ़ती जा रही है औरये  चैतन्य बुशबू चारों ओर फैल्कर आत्माओं को आकर्षित कर रही हे। सर्व आत्माएं खुशबूदार फूल बन रही हैं।सारी बसुंधरा चैतन्य फूलों से महक उठी है।  चिन्तन चैतन्य फूल में रंग का आधार है याद वा दिव्यगुण | क्या मैं ज्ञान- ज्ञान और खुशबू का आधार है  दिव्यगुणों में परिपक्व बनी हू ? रूहानी खुशबू से वायुमंडल को सुगंधित करती हूँ? क्या मैंने स्वयं को - योग॰ बनाया है जो भगवान को अर्पित हो सकूं ? इतना लायक Ur मैं भगवान के बगीचे का Rl 8 पुष्प हू रूहानी  ष्यमान8 योगाभ्यास   पुण हूँ | फाउण्ठेन के समान याबा से निकलती ज्ञान, गुण चा मैें शिवयाया के बगीचे का रूहानी शक्तियों की किरणें निरंतर मुझे सींच रही हें जिससे मेरे अंदर दिव्यगुणों की खुशबू बढ़ती जा रही है औरये  चैतन्य बुशबू चारों ओर फैल्कर आत्माओं को आकर्षित कर रही हे। सर्व आत्माएं खुशबूदार फूल बन रही हैं।सारी बसुंधरा चैतन्य फूलों से महक उठी है।  चिन्तन चैतन्य फूल में रंग का आधार है याद वा दिव्यगुण | क्या मैं ज्ञान- ज्ञान और खुशबू का आधार है  दिव्यगुणों में परिपक्व बनी हू ? रूहानी खुशबू से वायुमंडल को सुगंधित करती हूँ? क्या मैंने स्वयं को - योग॰ बनाया है जो भगवान को अर्पित हो सकूं ? इतना लायक Ur - ShareChat