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#🤲अल्लाह हु अक़बर #🤲 इबादत #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲
🤲अल्लाह हु अक़बर - मनकबते बाप अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में या'नी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह आई क़ज़ा तो चुप के से तन्हा चला गया अफ़सोस किस के बाप से जा कर कहें ये बात दाग़ ए यतीमी दे के वो हँस्ता चला गया इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया मनकबते बाप अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में या'नी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह आई क़ज़ा तो चुप के से तन्हा चला गया अफ़सोस किस के बाप से जा कर कहें ये बात दाग़ ए यतीमी दे के वो हँस्ता चला गया इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया - ShareChat