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#📒 मेरी डायरी #📜मेरी कलम से✒️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
📒 मेरी डायरी - सबके बीच रहता हूँ, पर अपना कोई नहीं, बात तो सब करते हैं, पर समझने वाला कोई नहीं, दिल के अंदर दर्द का दरिया बस गया है, मगर उसे कहने का अब सहारा कोई नहीं, हँसी तो आज भी कभी कभी चेहरे पर आ जाती है, मुस्कान जैसी बात अब कहाँ रही. मगरवो पुरानी सबके बीच रहता हूँ, पर अपना कोई नहीं, बात तो सब करते हैं, पर समझने वाला कोई नहीं, दिल के अंदर दर्द का दरिया बस गया है, मगर उसे कहने का अब सहारा कोई नहीं, हँसी तो आज भी कभी कभी चेहरे पर आ जाती है, मुस्कान जैसी बात अब कहाँ रही. मगरवो पुरानी - ShareChat