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#⏳शब्द से शायरी: वक़्त #✨हमार विचार #💌शब्द से शायरी-मोहब्बत #💌शायरी के डायरी📚 #✒ शायरी
⏳शब्द से शायरी: वक़्त - अब तुझ से भी मोहब्बत नहीं रही, ऐ मुझ को ज़िंदगी तेरी भी मुझे ज़रूरत नहीं रही , बुझ गये अब उस के इंतेज़ार के वो जलते दिए, कहीं भी आस-्पास उस की आहट नहीं रही अब तुझ से भी मोहब्बत नहीं रही, ऐ मुझ को ज़िंदगी तेरी भी मुझे ज़रूरत नहीं रही , बुझ गये अब उस के इंतेज़ार के वो जलते दिए, कहीं भी आस-्पास उस की आहट नहीं रही - ShareChat