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#जय श्री कृष्णा
जय श्री कृष्णा - श्रीकृष्ण कहते हैं कि ॰॰ हे धनंजय... ! संसार की हलचल में मन को मत डगमगाने दो। जो स्वयं के भीतर स्थिर है, उसे बाहर की आँधियाँ हिला नहीं सकतीं | कर्म करते चलो निस्वार्थ भाव से, क्योंकि हर सत्कर्म भविष्य का बीज है। कल की शक्ति बनता है। आज का संयम , और याद रखो -जिसने अपने भय को साध लिया, उसने अपने भाग्य को गढ़ लिया। हरि नाम ही आधार है श्रीकृष्ण कहते हैं कि ॰॰ हे धनंजय... ! संसार की हलचल में मन को मत डगमगाने दो। जो स्वयं के भीतर स्थिर है, उसे बाहर की आँधियाँ हिला नहीं सकतीं | कर्म करते चलो निस्वार्थ भाव से, क्योंकि हर सत्कर्म भविष्य का बीज है। कल की शक्ति बनता है। आज का संयम , और याद रखो -जिसने अपने भय को साध लिया, उसने अपने भाग्य को गढ़ लिया। हरि नाम ही आधार है - ShareChat