ShareChat
click to see wallet page
search
#✍ कविता 📓 #✒ शायरी #✨हमार विचार
✍ कविता 📓 - रखती हूं॰ रखती हूं पहनावा में अदब लहजा जरा नरम जिद पर आ जाऊं तो हर चीज से मुंह मोड़ लूँ मैं अपने अंदर इतना सब्र रखती हूं . ! ! ७०० ( रखती हूं॰ रखती हूं पहनावा में अदब लहजा जरा नरम जिद पर आ जाऊं तो हर चीज से मुंह मोड़ लूँ मैं अपने अंदर इतना सब्र रखती हूं . ! ! ७०० ( - ShareChat