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#✍️ जीवन में बदलाव
✍️ जीवन में बदलाव - (बाप का दर्द) बाप वो शख्स है जो सबसे ज़्यादा थककर भी सबसे कम बोलता है। अपनी भूख, अपनी बीमारी, सब पीछे छोड़ देता है। बच्चों की हँसी के लिए अपने सपनों को चुपचाप मार देता है। বিন ৪ং মতনুন বিস্রনা ই, হালী ম ওাকলা होता है। कोई पूछे न पूछे, हर चिंता खुद उठा लेता है। भी बोझ कहलाने से डरता है। बुढ़ापे में आँसुओं में नहीं दिखता। बाप का दर्द वह उसकी खामोशी और झुके कंधों में छुपा होता है। (बाप का दर्द) बाप वो शख्स है जो सबसे ज़्यादा थककर भी सबसे कम बोलता है। अपनी भूख, अपनी बीमारी, सब पीछे छोड़ देता है। बच्चों की हँसी के लिए अपने सपनों को चुपचाप मार देता है। বিন ৪ং মতনুন বিস্রনা ই, হালী ম ওাকলা होता है। कोई पूछे न पूछे, हर चिंता खुद उठा लेता है। भी बोझ कहलाने से डरता है। बुढ़ापे में आँसुओं में नहीं दिखता। बाप का दर्द वह उसकी खामोशी और झुके कंधों में छुपा होता है। - ShareChat