#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
#क्या_आप_जानते_हैं_?
पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में निर्णायक ज्ञान बताया गया हैं, सुक्ष्मवेद की वाणी हैं...
गरीब,राम सरीखे राम हैं,सन्त सरीखे सन्त *
नाम सरीखा नाम हैं,नहीं आदि नहीं अन्त **
अर्थात् काल लोक में हम अज्ञानवश अनेक शक्तियों को भगवान मान बैठे हैं और सभी भेषधारी,चमत्कारी,हठयोगी और बड़े मनमोहक कथा कहने वाले सन्त को हम सच्चा सन्त समझ बैठे हैं और उसी प्रकार से उनके द्वारा जो भी नाम अथवा मंत्र दिए जा रहे हैं उन्हें हम तारक मंत्र जानकर साधना कर रहे हैं जबकि ऐसा नहीं हैं।
सतगुरू देव जी बताते हैं कि
✓ जिस परमेश्वर की शक्ति की ना कोई आदि हैं ना कोई अन्त हैं केवल उस परमेश्वर (#Allmighty_GOD_KABIR) की भक्ति ही हमारे लिए कल्याणकारी हैं।
✓ समस्त सन्तों में शिरोमणि केवल तत्वदर्शी सन्त ही होता हैं, वही जगत उद्धारक सन्त होता हैं। अतएव हमें केवल तत्वदर्शी सन्त से ही नाम उपदेश लेना चाहिए।
✓ शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना के यथार्थ मंत्र/मूल मंत्र केवल #सत्यनाम और #सारनाम हैं और इससे ही जीव का मोक्ष हो सकता हैं,अन्य मंत्र शास्त्र सम्मत नहीं होने से जीवन नाशक हैं।
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