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#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - कभी " खानदानी" लोगों के साथ बैठ कर देखना पता चलेगा " औकात" का मतलब "पैसा" नहीं "जुबान" होती है ...!! कभी " खानदानी" लोगों के साथ बैठ कर देखना पता चलेगा " औकात" का मतलब "पैसा" नहीं "जुबान" होती है ...!! - ShareChat