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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - फीर से अर्ज़ है ग़लतियो से जुदा तू भी नही में भी नही दोनो इन्सान हैं ख़ुदा तु भी नही में भी नही और में तुझे इल्ज़ाम देतें हैं मगर तु मुझे अपने अन्दर झांकता तु भी नही में भी नही करदी दोनो में पैदा दुरियां ग़लत फेहमियों ने वर्ना फितरत का बुरा तु भी नही में भी नही फीर से अर्ज़ है ग़लतियो से जुदा तू भी नही में भी नही दोनो इन्सान हैं ख़ुदा तु भी नही में भी नही और में तुझे इल्ज़ाम देतें हैं मगर तु मुझे अपने अन्दर झांकता तु भी नही में भी नही करदी दोनो में पैदा दुरियां ग़लत फेहमियों ने वर्ना फितरत का बुरा तु भी नही में भी नही - ShareChat