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#संस्कृत सुभाषितमाला #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍मराठी साहित्य ✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿ ✿ शुक्रवार दि. २० फेब्रुवारी २०२६✿ ✿ फाल्गुन शु. तृतीया १९४७ ✿ ✿ विक्रम सवत्सर २०८२✿ ✿शिवशक ३५२✿ ✿•••┈┅━꧁ ۩🌟۩ ꧂━┅┈•••✿ ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ ✿•••┈┅━꧁ ۩🌟۩ ꧂━┅┈•••✿ आत्मनो बलमज्ञाय धर्मार्थपरिवर्जितम्। अलभ्यमिच्छन्नैष्कर्म्यान्मूढबुद्धिरिहोच्यते।। जो अशक्त होते हुए भी, किसी भी प्रकार से बिना श्रम किए, किसी अप्राप्य वस्तु की कामना करता है, लोग उसे मूर्ख कहते हैं। ✿•••┈┅━꧁ ⚜️ ꧂━┅┈•••✿