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मेरी डायरी ✍️ #मेरी डायरी ✍️ ##मेरी डायरी #मेरी डायरी... #मेरी डायरी #मेरी डायरी
मेरी डायरी ✍️ - चेहरे पर नकाब हैं, हर रिश्ता साया।  छलकतीं , पर आंखें छुपातीं  मुस्कानें कहने से हर जुबां क्यों घबराती? 4 संग चलते हैं, पर दूरियाँ निभाते, शब्दों में मिठास , दिल में शिकवे सजाते। जिन्हें समझा अपना, वे भी पराए निकले, साथ दिया जिन्होंने, अनजाने सुख के सितारे दिखले। धागे रिश्तों के, कब टूट गए पता न चला, न जाने कब वफा से भरोसे का बंधन हिला। क्या है सच्चा , क्या है छलावा, पता नहीं कौन है अपना, कौन है पराया।  Rupesh Kuar gansod] चेहरे पर नकाब हैं, हर रिश्ता साया।  छलकतीं , पर आंखें छुपातीं  मुस्कानें कहने से हर जुबां क्यों घबराती? 4 संग चलते हैं, पर दूरियाँ निभाते, शब्दों में मिठास , दिल में शिकवे सजाते। जिन्हें समझा अपना, वे भी पराए निकले, साथ दिया जिन्होंने, अनजाने सुख के सितारे दिखले। धागे रिश्तों के, कब टूट गए पता न चला, न जाने कब वफा से भरोसे का बंधन हिला। क्या है सच्चा , क्या है छलावा, पता नहीं कौन है अपना, कौन है पराया।  Rupesh Kuar gansod] - ShareChat