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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - எ भक्ति से हनुमान जी प्रसन्न श्रीराम जी की होते हैं 1 मंदिर जाकर जय श्रीराम और जयकारा   मन को आत्मविभोर करदिता है। लेकिन दूसरों को राम राम कहने में अहं आड़े जाता है। मंदिर की भक्ति सिब व्यर्थ। आ इसलिए बिना   अहं सनातनियों से राम राम कहें। पीजी Purushottam Goswami எ भक्ति से हनुमान जी प्रसन्न श्रीराम जी की होते हैं 1 मंदिर जाकर जय श्रीराम और जयकारा   मन को आत्मविभोर करदिता है। लेकिन दूसरों को राम राम कहने में अहं आड़े जाता है। मंदिर की भक्ति सिब व्यर्थ। आ इसलिए बिना   अहं सनातनियों से राम राम कहें। पीजी Purushottam Goswami - ShareChat