बदलाव की पहली आहट
सावित्री जब से महिला समूह में जाने लगी थी, उसकी दुनिया कुछ बदलने लगी थी।
अब उसके दिनों में सिर्फ़ घर और दुकान की भागदौड़ नहीं, बल्कि सीखने की खुशी भी शामिल थी।
उसके हाथों में न सिर्फ़ काम की कुशलता बढ़ रही थी, बल्कि उसके आत्मविश्वास में भी एक नई चमक आ रही थी।
महिला समूह में उसने सबसे ज़्यादा रुचि पापड़-बड़ी बनाने में ली।
उसकी बनाई चीज़ों में एक अलग ही स्वाद था—नरम, कुरकुरी और बिल्कुल घर जैसा।
समूह की टीचर भी अक्सर कहतीं
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