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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - संभल कर चल नादान, ये इंसानों की बस्ती है ೦ यहां रब को भी लेते हैं, तेरी आजमा हस्ती है !! I I संभल कर चल नादान, ये इंसानों की बस्ती है ೦ यहां रब को भी लेते हैं, तेरी आजमा हस्ती है !! I I - ShareChat