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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - जिंदगीकी सच्चाई ४० की उम्र के बाद पढ़ाई और डिग्री की कोई वैल्यू नहीं रहती है॰कई बार हम चाय वाले के पास खड़े होते हैं,तो पता चलता है॰ये अनपढ़ है और इसकी इनकम तो मेरे से भी ज्यादा है और वह भी टैक्स फ्री है। तब बड़ा धक्का लगता है ५० की उम्र के बाद सुंदरता की कोई वैल्यू नहीं होती। चेहरा इतना खराब हो जाता है कि लोग सजना संवरना भी बंद कर देते हैं। की वैल्यू भी खत्म हो जाती  ६० साल के बाद पद और प्रतिष्ठा  है.किसी समय आपके साइन से पूरा शहर चला करता था , मगर ६० के बाद वहां का चपरासी भी आपको सलाम नहीं करेगा। ७० साल की उम्र के बाद घर छोटा हो या बड़ा इसकी भी कोई वैल्यू नहीं रह जाती.अगर डबल मंजिला हो,तो ऊपर चढ़ने में घुटनों में दर्द होगा,तो उस समय छोटा घर ही आराम देता है ८० साल की उम्र के बाद आपके अकाउंट में करोड़ों रुपए पडे़े हों आपके किसी काम के नहीं है आपको रोज खानी १०० रूपये की गोलियां ही है जिंदगी में भाग दौड़ करके, कितने परपंच रचे होंगे इस पैसे को इकट्टा करने के लिए। किसी समय दिमाग में था कि पैसे इकट्टे हो जाएंगे ,तो एंजॉय करेंगे। मगर भैया कुछ इंजॉय नहीं होगा।  सब बुढ़ापे की तरफ जा रहे हैं और बुढ़ापे में हम सबको स्ट्रगल  हम करना है बीमारियों से।और कुछ नहीं होगा। और हमारे सामने हमारे बच्चे हमारे रिलेटिव उन पैसों कामजा लेंगे जिन्हें अपना स्वास्थ्य भी दांव पर लगा दिया॰  কমান ক লি हमने था। इसलिए आप जहां पर भी हैं,वहां पर रुक जाए | और जो कुछ भी भगवान ने आपको दिया है,उसका आनंद लीजिए। औलाद के लिए एक लाख छोड़ कर जाओ या दस करोड़। उन्हेंवे कम ही लगेंगे। जिंदगीकी सच्चाई ४० की उम्र के बाद पढ़ाई और डिग्री की कोई वैल्यू नहीं रहती है॰कई बार हम चाय वाले के पास खड़े होते हैं,तो पता चलता है॰ये अनपढ़ है और इसकी इनकम तो मेरे से भी ज्यादा है और वह भी टैक्स फ्री है। तब बड़ा धक्का लगता है ५० की उम्र के बाद सुंदरता की कोई वैल्यू नहीं होती। चेहरा इतना खराब हो जाता है कि लोग सजना संवरना भी बंद कर देते हैं। की वैल्यू भी खत्म हो जाती  ६० साल के बाद पद और प्रतिष्ठा  है.किसी समय आपके साइन से पूरा शहर चला करता था , मगर ६० के बाद वहां का चपरासी भी आपको सलाम नहीं करेगा। ७० साल की उम्र के बाद घर छोटा हो या बड़ा इसकी भी कोई वैल्यू नहीं रह जाती.अगर डबल मंजिला हो,तो ऊपर चढ़ने में घुटनों में दर्द होगा,तो उस समय छोटा घर ही आराम देता है ८० साल की उम्र के बाद आपके अकाउंट में करोड़ों रुपए पडे़े हों आपके किसी काम के नहीं है आपको रोज खानी १०० रूपये की गोलियां ही है जिंदगी में भाग दौड़ करके, कितने परपंच रचे होंगे इस पैसे को इकट्टा करने के लिए। किसी समय दिमाग में था कि पैसे इकट्टे हो जाएंगे ,तो एंजॉय करेंगे। मगर भैया कुछ इंजॉय नहीं होगा।  सब बुढ़ापे की तरफ जा रहे हैं और बुढ़ापे में हम सबको स्ट्रगल  हम करना है बीमारियों से।और कुछ नहीं होगा। और हमारे सामने हमारे बच्चे हमारे रिलेटिव उन पैसों कामजा लेंगे जिन्हें अपना स्वास्थ्य भी दांव पर लगा दिया॰  কমান ক লি हमने था। इसलिए आप जहां पर भी हैं,वहां पर रुक जाए | और जो कुछ भी भगवान ने आपको दिया है,उसका आनंद लीजिए। औलाद के लिए एक लाख छोड़ कर जाओ या दस करोड़। उन्हेंवे कम ही लगेंगे। - ShareChat