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News Today - कहा- सजा देने का अधिकार न्यायालय को है, पुलिस को नहीं पदोन्नति केलिएपुलिसकर्मी एनकाउंटर कर रहे :हाईकोर्ट निर्देशका पालननहीं विधि संवाददाता | प्रयागराज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों के पैरों  कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुटभेड  मेंगोली मारने औरइसे मुठभेड़करारदेने  को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की यूपी पुलिस को प्रथा को गंभीरता से का पालन नहीं किया गया है। याची लियाहै।कोर्टनेकहाकिऐसा आचरण मुठभेड में गंभीर रूप से घायल हा गया। पूरी तरह अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने पुलिस ने न तो चिकित्साधिकारी या अधिकार केवल न्यायालयोंके पास  मॅजिस्ट्रेट के समक्ष घायल का बयान दर्ज  है, पुलिसके पास नहीं ।पुलिस पदोन्नति  किया और न ही मुठभेड़ की जांच उच्च  के लिए एनकाउंटर कर रहीो है। रेक के किसी अधिकारी द्वारा की गई है यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार  एसपी एसएसपी भी होंगे अवमानना के दोषी सिंह देशवाल ने मिर्जापुर के राजू उर्फ  राजकुमार वदो अन्य को जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय  अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया।  दिशा - निर्देशों के उल्लंघन पर कडा़ रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि किसी भी॰ तीनों पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गए जिले में पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई मृत्यु या आरोपी को गंभीर चोट के  थे। कोर्ट ने टिप्पणी को कि पुलिस  মামলা ৭ ত্রীয়ুমীবল কমল সঁ নিঘবিলি সক্রিয়া কা এালন নমী কিযা মযা নী मुठभेड़की प्रथा, विशेप रूप से आरोपी वाला अधिकारी ही नर्ही, बल्कि संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख एसपी, एसएसपी  व्यक्तियों के पैरों में गोली चलाना पुलिस आयुक्त भी न्यायालय की अवमानना के दोषी माने जाएंगे ।  नियमितघटना बनगईहै।यहस्पष्टरूप  लेती है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी॰ सेवरिष्ठ अधिकारियों कोप्रसन्नकरने न्यायपालिका के कार्य स्पष्ट व सुस्पष्ट  हैं पुलिस द्वारा न्यायिक क्षेत्र में किसी भी॰ या आरोपी को तथाकथित पुलिस अधिकारी को कोई चोट  सबक प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है। सिखाने और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन आई   है जिससे इन   मुठभेड़ कोर्टने कहा कि अक्सर ऐसे मामले केलिएकिया जाता है।कोर्टनेकहा कि आग्नेयास्त्रों उपयोग लोकतांत्रिक राज्य है जो कानून आते है जहां चोरी जैसे आवश्यकता और आनुपातिकता पर मामूली  সানে अपराधों में भी पुलिस मुठभेड़ का रूप  और भी सवाल उठते हैं। के शासन द्वारा शासित है इसलिए देकर अंधाधृंध गोलोबारी का सहारा विधायिका  कार्यपालिका  र कहा- सजा देने का अधिकार न्यायालय को है, पुलिस को नहीं पदोन्नति केलिएपुलिसकर्मी एनकाउंटर कर रहे :हाईकोर्ट निर्देशका पालननहीं विधि संवाददाता | प्रयागराज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों के पैरों  कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुटभेड  मेंगोली मारने औरइसे मुठभेड़करारदेने  को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की यूपी पुलिस को प्रथा को गंभीरता से का पालन नहीं किया गया है। याची लियाहै।कोर्टनेकहाकिऐसा आचरण मुठभेड में गंभीर रूप से घायल हा गया। पूरी तरह अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने पुलिस ने न तो चिकित्साधिकारी या अधिकार केवल न्यायालयोंके पास  मॅजिस्ट्रेट के समक्ष घायल का बयान दर्ज  है, पुलिसके पास नहीं ।पुलिस पदोन्नति  किया और न ही मुठभेड़ की जांच उच्च  के लिए एनकाउंटर कर रहीो है। रेक के किसी अधिकारी द्वारा की गई है यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार  एसपी एसएसपी भी होंगे अवमानना के दोषी सिंह देशवाल ने मिर्जापुर के राजू उर्फ  राजकुमार वदो अन्य को जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय  अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया।  दिशा - निर्देशों के उल्लंघन पर कडा़ रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि किसी भी॰ तीनों पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गए जिले में पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई मृत्यु या आरोपी को गंभीर चोट के  थे। कोर्ट ने टिप्पणी को कि पुलिस  মামলা ৭ ত্রীয়ুমীবল কমল সঁ নিঘবিলি সক্রিয়া কা এালন নমী কিযা মযা নী मुठभेड़की प्रथा, विशेप रूप से आरोपी वाला अधिकारी ही नर्ही, बल्कि संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख एसपी, एसएसपी  व्यक्तियों के पैरों में गोली चलाना पुलिस आयुक्त भी न्यायालय की अवमानना के दोषी माने जाएंगे ।  नियमितघटना बनगईहै।यहस्पष्टरूप  लेती है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी॰ सेवरिष्ठ अधिकारियों कोप्रसन्नकरने न्यायपालिका के कार्य स्पष्ट व सुस्पष्ट  हैं पुलिस द्वारा न्यायिक क्षेत्र में किसी भी॰ या आरोपी को तथाकथित पुलिस अधिकारी को कोई चोट  सबक प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है। सिखाने और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन आई   है जिससे इन   मुठभेड़ कोर्टने कहा कि अक्सर ऐसे मामले केलिएकिया जाता है।कोर्टनेकहा कि आग्नेयास्त्रों उपयोग लोकतांत्रिक राज्य है जो कानून आते है जहां चोरी जैसे आवश्यकता और आनुपातिकता पर मामूली  সানে अपराधों में भी पुलिस मुठभेड़ का रूप  और भी सवाल उठते हैं। के शासन द्वारा शासित है इसलिए देकर अंधाधृंध गोलोबारी का सहारा विधायिका  कार्यपालिका  र - ShareChat