तुलसी के पौधे के लिए संस्कृत में कई स्तोत्र और मंत्र हैं, जो उनकी महिमा, पवित्रता और विष्णु प्रियता का वर्णन करते हैं। यहाँ कुछ मुख्य श्लोक और मंत्र दिए गए हैं:
1. तुलसी प्रणाम मंत्र (Tulsi Pranam Mantra)
यह श्लोक तुलसी माता को जल अर्पित करते समय या पूजा के समय बोला जाता है:
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।
अर्थ: हे तुलसी माता! आप महाप्रसाद उत्पन्न करने वाली, सभी सौभाग्य को बढ़ाने वाली और मानसिक व शारीरिक रोगों को नष्ट करने वाली हैं। आपको मेरा नमन है।
2. तुलसी स्तोत्रम् (शुरुआती पंक्तियाँ)
नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके॥
अर्थ: हे कल्याणकारी तुलसी! आपको नमस्कार है, हे विष्णुप्रिया, हे शुभे (मंगलमयी)! आपको नमस्कार है, हे मोक्ष प्रदान करने वाली देवी, आपको नमस्कार है, हे संपत्ति देने वाली!
3. तुलसी गायत्री मंत्र (Tulsi Gayatri Mantra)
ॐ श्री तुलस्यै च विद्महे, विष्णु प्रियायै च धीमहि।
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।
अर्थ: हम देवी तुलसी का ध्यान करते हैं, जो भगवान विष्णु की प्रिय हैं। हे वृंदा (तुलसी)! हमें उच्च बुद्धि प्रदान करें और हमारे मन को प्रकाशित करें।
4. पत्ते तोड़ते समय का मंत्र (Tulsi Picking Mantra)
तुलसी अमृत-जन्मसी, सदा त्वम् केशव-प्रिया।
केशवार्थं चीनोमि त्वम्, वरदा भव शोभने॥
अर्थ: हे तुलसी! आपका जन्म अमृत से हुआ है और आप सदा केशव (भगवान विष्णु) की प्रिया हैं। मैं आपको केशव की पूजा के लिए तोड़ रहा हूँ, हे शोभने! आप वरदान देने वाली बनें।
5. तुलसी के 8 नाम (Tulsi Ashtakam)
तुलसी स्तोत्र में तुलसी के आठ नामों का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
वृन्दा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी।
पुष्पसारा, नन्दिनी, कृष्णजीवनी, नमोऽस्तुते॥
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