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#✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #🖋कहानी: टूटे दिल की💔 #🌙रात की शायरी✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - तक ये मन को अंधेरे छलेंगे कहाँ उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे कभी सुख कभी दुख यही जिंदगी हैं। ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घडी हैं। नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे भले तेज कितना, हवा का हो झोंका সন ৭ নু ২স্র ঐ থহীমা  मगर अपने में तुझे फिर मिलेंगे जो बिछड़े सफ़र उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे कहे कोई कुछ भी॰ मगर सच यही है। लहर प्यार की जो कहीं उठ रही है। उसे एक दिन तो किनारे मिलेंगे उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे ।। तक ये मन को अंधेरे छलेंगे कहाँ उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे कभी सुख कभी दुख यही जिंदगी हैं। ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घडी हैं। नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे भले तेज कितना, हवा का हो झोंका সন ৭ নু ২স্র ঐ থহীমা  मगर अपने में तुझे फिर मिलेंगे जो बिछड़े सफ़र उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे कहे कोई कुछ भी॰ मगर सच यही है। लहर प्यार की जो कहीं उठ रही है। उसे एक दिन तो किनारे मिलेंगे उदासी भरे दिन कहीं तो ढलेंगे ।। - ShareChat