ShareChat
click to see wallet page
search
#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - यहजो पिन्डी यह   छोट # = पैमाने पर काल ही है यह काल का कारिन्दा  हैजो प्रत्येक आत्मा के साथ लगा दिया गया है ताकि यह आत्मा को तीसरे तिल से रखे और संसार में उलझाये रखे। दूर D साधक को एकाग्रता रूहानी तरक्की  लिये जरूरी है जो जो अच्छे अभ्यासी " ক্ী  में भजन करते हैं॰ एकांत ৮ বা কান में बैठने से एकाग्रता जल्दी आती है। D जब हम गुरु और सत्संग से दूर बैठते हैं तब दुनिया अप्रत्यक्ष और अदृश्य रूप से हम पर इतना अधिक प्रभाव डालती  भजन  के और 8 க ரa 7 सुमिरन लिये समय देने पर भी हम अक्सर निराश शुष्क और सूना महसूस करने लगते हैं । वह आत्मा है॰जो स्थूल D गुरु मुख लिंग सूक्ष्म और कारण शरीरों को साधना  है और पार ब्रह्म में पहुंच करक उतार चुकी T1 ೯/ ० सत्संगी वह है जिसने किसी सतगुरु और 0 # =IHT f ह भजन करता है। सुमिरन एक उत्तम रसायन सुमिरन ০ লাস কা यह सब रोगों का इलाज है यह आत्मा ह का आत्मिक भोजन है सुमिरन के द्वारा जब यह आत्मा अपने बिखरे प्रकाश को एकत्र कर लेती है तब उसकी आंख यानि दिव्य खल जाती ह और वह अपना आत्म आख साक्षात्कार करती है। यहजो पिन्डी यह   छोट # = पैमाने पर काल ही है यह काल का कारिन्दा  हैजो प्रत्येक आत्मा के साथ लगा दिया गया है ताकि यह आत्मा को तीसरे तिल से रखे और संसार में उलझाये रखे। दूर D साधक को एकाग्रता रूहानी तरक्की  लिये जरूरी है जो जो अच्छे अभ्यासी " ক্ী  में भजन करते हैं॰ एकांत ৮ বা কান में बैठने से एकाग्रता जल्दी आती है। D जब हम गुरु और सत्संग से दूर बैठते हैं तब दुनिया अप्रत्यक्ष और अदृश्य रूप से हम पर इतना अधिक प्रभाव डालती  भजन  के और 8 க ரa 7 सुमिरन लिये समय देने पर भी हम अक्सर निराश शुष्क और सूना महसूस करने लगते हैं । वह आत्मा है॰जो स्थूल D गुरु मुख लिंग सूक्ष्म और कारण शरीरों को साधना  है और पार ब्रह्म में पहुंच करक उतार चुकी T1 ೯/ ० सत्संगी वह है जिसने किसी सतगुरु और 0 # =IHT f ह भजन करता है। सुमिरन एक उत्तम रसायन सुमिरन ০ লাস কা यह सब रोगों का इलाज है यह आत्मा ह का आत्मिक भोजन है सुमिरन के द्वारा जब यह आत्मा अपने बिखरे प्रकाश को एकत्र कर लेती है तब उसकी आंख यानि दिव्य खल जाती ह और वह अपना आत्म आख साक्षात्कार करती है। - ShareChat