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दो सहेली - एक हास्य कविता #laughterkefatke #📚कविता-कहानी संग्रह #kavita #कविता
laughterkefatke - ५८. दो सहेली सबको खल रही थी जेठ की दुपहरिया तेज धूप के साथ गर्म हवाएँ चल रही थी। दो लड़कियाँ बातें करते हुए जा रही थी॰ एक दूजे को प्यार के किस्से सुना रही थी। उनमें से एक मेरी गाडी से थी टकराई मेरे पास आकर बड़े जोर से चिल्लाई। दिखने में तो लग रही थी कितनी भोली मैं कुछ बोल पाता उससे पहले वो बोली।  भैया लगता है आपको दिखाई कम देता है या आपको गाडी चलाना ही नहीं आता है। दिन में भी लगता है जैसे सपने देखते हो अपनी गाडी से आप लोगों को ठोकते हो? आश्चर्य चकित हो गया मैं यह बात सुनकर गुस्से से देखने लगा मैं उसको घूर घूर कर। सोचने वाली बात ये थी गाड़ी बन्द पड़ी थी मैं गाड़ी के अन्दर था वो साइड में खडी थी! बन्द गाडी कैसे टक्कर मार सकती है ये बात आपको समझ में नहीं आती है। गलती का एहसास होने पर वो घबरा गई मुस्कुरा कर देखने लगी बाद में शर्मा गई।  मुस्कुराहट का भी जब असर नहीं हुआ आँखों से नदी बहाना उसने शुरू किया। उसकी गलती होने पर भी मैं माफ़ी माँग रहा था से उलझने पर ख़ुद को कोस रहा था। লভকী तब से लड़कियों से दूरी बनाकर रखता हूँ गाडी भी अपनी इनसे कोसों दूर रखता हूँ सुमित मानधना ' गौरव सूरत ५८. दो सहेली सबको खल रही थी जेठ की दुपहरिया तेज धूप के साथ गर्म हवाएँ चल रही थी। दो लड़कियाँ बातें करते हुए जा रही थी॰ एक दूजे को प्यार के किस्से सुना रही थी। उनमें से एक मेरी गाडी से थी टकराई मेरे पास आकर बड़े जोर से चिल्लाई। दिखने में तो लग रही थी कितनी भोली मैं कुछ बोल पाता उससे पहले वो बोली।  भैया लगता है आपको दिखाई कम देता है या आपको गाडी चलाना ही नहीं आता है। दिन में भी लगता है जैसे सपने देखते हो अपनी गाडी से आप लोगों को ठोकते हो? आश्चर्य चकित हो गया मैं यह बात सुनकर गुस्से से देखने लगा मैं उसको घूर घूर कर। सोचने वाली बात ये थी गाड़ी बन्द पड़ी थी मैं गाड़ी के अन्दर था वो साइड में खडी थी! बन्द गाडी कैसे टक्कर मार सकती है ये बात आपको समझ में नहीं आती है। गलती का एहसास होने पर वो घबरा गई मुस्कुरा कर देखने लगी बाद में शर्मा गई।  मुस्कुराहट का भी जब असर नहीं हुआ आँखों से नदी बहाना उसने शुरू किया। उसकी गलती होने पर भी मैं माफ़ी माँग रहा था से उलझने पर ख़ुद को कोस रहा था। লভকী तब से लड़कियों से दूरी बनाकर रखता हूँ गाडी भी अपनी इनसे कोसों दूर रखता हूँ सुमित मानधना ' गौरव सूरत - ShareChat