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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - बस अपना ही ग़म देखते हैं लोग कितना कम देखते हैं लोग ৭} ( 8 ட बस अपना ही ग़म देखते हैं लोग कितना कम देखते हैं लोग ৭} ( 8 ட - ShareChat