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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🥰प्रेम कविता📝 #🌹प्रेमरंग
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - मौजूदगी तुम   जैसे कहते वैसे होते काश इतने शिकवे इतने गिले कहां होते सूरज तो उगता मगर रात की तरह यहां दिन मे भी झिलमिल से सितारे चमकते तुम खुद से ही बहुत दूर भटके होनाजाने तुम कहया अटके हौ ही तुम्ह मे मौजूदगी होती तुम्हारी @9T भटकती ना जिँदगी, जिंदगी करुछ और होती hansral मौजूदगी तुम   जैसे कहते वैसे होते काश इतने शिकवे इतने गिले कहां होते सूरज तो उगता मगर रात की तरह यहां दिन मे भी झिलमिल से सितारे चमकते तुम खुद से ही बहुत दूर भटके होनाजाने तुम कहया अटके हौ ही तुम्ह मे मौजूदगी होती तुम्हारी @9T भटकती ना जिँदगी, जिंदगी करुछ और होती hansral - ShareChat