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🙇‍♂️बिन उपदेश अचभ है, ये क्यों जीवत है प्राण भक्ति बिना कहा ठौर है ये नर नहीं पाषाण. ये भोले प्राणी तू क्या आशा लेकर जी रहा है. 🙍 #@@@
@@@ - बिन उपदेश अचम्भ है, அ Far ೯ प्राण | भक्ति बिना कहाँ ठौर है नर नाहीं पाषाण परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि॰हे भोले भावार्थः- है कि बिना गुरू से दीक्षा  লিব आश्चर्य मानव!  मुझ किस आशा को लेकर जीवित है।न तो शरीर तेरा है, फिर सम्पत्ति आपकी कैसे है? यह भी त्यागकर जाएगा जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sollok Ashram Betul @Sollok - Ashrom _ Belul @SatlokBetull बिन उपदेश अचम्भ है, அ Far ೯ प्राण | भक्ति बिना कहाँ ठौर है नर नाहीं पाषाण परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि॰हे भोले भावार्थः- है कि बिना गुरू से दीक्षा  লিব आश्चर्य मानव!  मुझ किस आशा को लेकर जीवित है।न तो शरीर तेरा है, फिर सम्पत्ति आपकी कैसे है? यह भी त्यागकर जाएगा जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sollok Ashram Betul @Sollok - Ashrom _ Belul @SatlokBetull - ShareChat