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#namaj #namaj se pahle kuchh hai #namaj ka sahi tarika
namaj - নমাড় মঐ২ करना नमाज़ को देर से पढ़ना अल्लाह की नापसंद चीज़ है। जब अज़ान होती है तो मुसलमान को फ़ौरन नमाज़ की तरफ़ बढ़ना चाहिए। देरी करने से दिल में ग़फ़लत पैदा होती है, रोज़ी से बरकत उठ जाती है और दुआओं में असर कम हो जाता है। हमारे नबी औ५क ने फ़रमाया कि जो नमाज़ में सुस्ती करता है, वह शैतान के धोखे में है। इसलिए काम कितना भी ज़रूरी हो, नमाज़ को सबसे ऊपर रखो। वक्त पर नमाज़ पढ़ना सिर्फ़ फ़र्ज़ अदा करना नहीं , बल्कि बरकत और राहत का सबसे बड़ा ज़रिया है। Dee & atej নমাড় মঐ২ करना नमाज़ को देर से पढ़ना अल्लाह की नापसंद चीज़ है। जब अज़ान होती है तो मुसलमान को फ़ौरन नमाज़ की तरफ़ बढ़ना चाहिए। देरी करने से दिल में ग़फ़लत पैदा होती है, रोज़ी से बरकत उठ जाती है और दुआओं में असर कम हो जाता है। हमारे नबी औ५क ने फ़रमाया कि जो नमाज़ में सुस्ती करता है, वह शैतान के धोखे में है। इसलिए काम कितना भी ज़रूरी हो, नमाज़ को सबसे ऊपर रखो। वक्त पर नमाज़ पढ़ना सिर्फ़ फ़र्ज़ अदा करना नहीं , बल्कि बरकत और राहत का सबसे बड़ा ज़रिया है। Dee & atej - ShareChat