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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - कहूँ वो कितना ख़ास है, 4 हर साँस में उसका एहसास है। पतझड़ में भी मेरा सावन है, थककर जिसकी देहरी पर बैठूँ - ऐसा वो मंदिर है। ডা आमनसी लड़की को चुनकर, मुझ जैसी खास बना दिया है। 3 उसके मुदल खाजोबघ्र मिला है। उसपर मुझे नाज़ है। क्या कहूँ उसके d ಹ' दिल कितना आबाद है। क्या कहूँ वो कितना ख़ास है। sara कहूँ वो कितना ख़ास है, 4 हर साँस में उसका एहसास है। पतझड़ में भी मेरा सावन है, थककर जिसकी देहरी पर बैठूँ - ऐसा वो मंदिर है। ডা आमनसी लड़की को चुनकर, मुझ जैसी खास बना दिया है। 3 उसके मुदल खाजोबघ्र मिला है। उसपर मुझे नाज़ है। क्या कहूँ उसके d ಹ' दिल कितना आबाद है। क्या कहूँ वो कितना ख़ास है। sara - ShareChat