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मेरी डायरी ✍️#मेरी डायरी ✍️ ##मेरी डायरी ##मेरी डायरी #मेरी डायरी #मेरी डायरी #मेरी डायरी.
मेरी डायरी ✍️ - कविता कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है करीब से देखा तो निकला रेत का घर, इसकी शान बहुत है | & # TR कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है Rupedh cKumat 8andod  कविता कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है करीब से देखा तो निकला रेत का घर, इसकी शान बहुत है | & # TR कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है Rupedh cKumat 8andod - ShareChat