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#santrampaljimaharaj #GodMorningWednesday #किसानगौरव_सम्मान_संतरामपालजी . नाम का निरंतर अभ्यास करो करत करत अभ्यास के जगमति हों सुजान। रसभरी आवत जात ही, सिर पर पडत निशान। कबीर साहेब कहते हैं कि निरंतर अभ्यास से जड़ बुद्धि वाला मनुष्य भी सुजान यानी ज्ञानी बन सकता है। यहाँ अभ्यास का अर्थ केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि नाम-स्मरण, आत्मचिंतन और सत्संग का लगातार अभ्यास है। कबीर साहेब उदाहरण देते हैं कि जैसे रस्सी का बार-बार आना-जाना पत्थर पर निशान छोड़ देता है। रस्सी न तो पत्थर से कठोर होती है, न तेज़ होती है, फिर भी निरंतर घर्षण से पत्थर पर अपनी छाप बना देती है। उसी तरह मन चाहे कितना भी चंचल, अज्ञानी या भटका हुआ क्यों न हो। अगर उसे रोज़ अभ्यास में लगाया जाए, तो वह भी बदल जाता है। धीरे-धीरे अच्छे संस्कार आने लगते हैं, विवेक जागता है, और अंतःकरण शुद्ध होने लगता है।जोर से नहीं, लगातार चलो। परिवर्तन अपने आप आएगा। साधना की जीत शोर में नहीं, निरंतरता में है। आज नहीं तो कल, निशान पड़ ही जाता है। यही कबीर साहेब का भरोसा है। लगातार अभ्यास करने से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान बन जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कुएँ से पानी खींचते समय रस्सी के बार-बार आने-जाने से कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं; यह हमें निरंतर प्रयास के महत्व और उससे मिलने वाली सफलता का संदेश देता है। निरंतर अभ्यास से मूर्ख भी बुद्धिमान बन सकता है। यह कहावत एक कहानी पर आ... Visit Sa News YouTube
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