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#आध्यात्मिक ज्ञान जैनियों का मानना है कि यह सृष्टि नर-मादा से उत्पन्न हुई है, इसका कोई रचयिता नहीं है। ऐसे लोगों को गीता अध्याय 16 श्लोक 8-9 में क्रूरकर्मी मनुष्य केवल जगत के नाश के लिए ही उत्पन्न हुए कहा है। अधिक जानकारी के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल #जैन_धर्म_की_सच्चाई Sant RampalJi YtChannel
आध्यात्मिक ज्ञान - जैन धर्म में ओंकार अर्थात रणोंकार का जाप किया जाता है। जबकि गीता अध्याय 8 श्लोक १३ के अनुसार यह ऊँ मंत्र ब्रह्म का है और ब्रह्म ने गीता अध्याय 7 श्लोक १८ में अपनी साधना को अनुत्तम (घटिया) बताया है। लिए अवश्य देखिए अधिक   जानकारी Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैबल Sant Rampal Ji YOUTUBE Book | fee Maharaj CHANNEL 749|6801825 slRuLV जैन धर्म में ओंकार अर्थात रणोंकार का जाप किया जाता है। जबकि गीता अध्याय 8 श्लोक १३ के अनुसार यह ऊँ मंत्र ब्रह्म का है और ब्रह्म ने गीता अध्याय 7 श्लोक १८ में अपनी साधना को अनुत्तम (घटिया) बताया है। लिए अवश्य देखिए अधिक   जानकारी Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैबल Sant Rampal Ji YOUTUBE Book | fee Maharaj CHANNEL 749|6801825 slRuLV - ShareChat