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यह कविता जीवन के कर्मों और उनके फल के बारे में है। इसमें लेखक उमंग सुल्लेरे ने जीवन के तीन पहलुओं - अतीत, भविष्य और वर्तमान - पर विचार किया है। कविता का संदेश है कि हमें अपने वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही हमारे हाथ में है। कविता की पंक्तियों का अर्थ: 1. *शुभाशुभ कर्मों के संग, रहते अनगिन जीवन इनमें अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा है*: अच्छे और बुरे कर्मों के साथ जीवन चलता है, और हर किसी की अपनी बारी आती है जब उसका भाग्य खुलता है। 2. *जगभर हो रहा हलचल, हम हम' अहं निहारा है*: दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन हम अपने अहंकार को देख रहे हैं। 3. *अतीत न भविष्य हमारा किन्तु वर्तमान हमारा है*: अतीत और भविष्य हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन वर्तमान हमारे हाथ में है। #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️
✍मेरे पसंदीदा लेखक - शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश - ShareChat