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#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - सृष्टि का रहस्य क्या है ? स्वामी जी गूढ़ भेदों को संसार की सत्ता को समझना चाहते हैं तो इसके 4 हम समझ सकते। ऐसा करने से इसके नतीजों के गलत के द्वारा नहीं तर्क की संभावना होती है। संसार के आदि और अन्त का निर्णय वैज्ञानिक नर्हीं सकते हैं कि सृष्टि कैसे बनाई गई, क्यों बनाई गई, संसार  केर सकते, नवे बता पर निर्भर रहने से fa बल बुराइयां क्यों हैं और कहां से आई করতল সাং লক ম बुद्धि, विचार जा सकता हे। परमात्मा 8 எ का सच्चा ज्ञान मालिक मंजिलें तय करके परे एक ऐसा भी मार्ग है जिस पर चलकर हम ऊंची सृष्टिकर्ता का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैर का॰ इस योनियों का चक्र, कर्मों का कानून चौरासी लाख सृष्टि आत्मा, परमात्मा , बातें हैं जिन पर एक बार तो का जीवन आदि ऐसी गूढ़ जन्म मरण কহলা ৪ী পউযা | क बाद गनुष्य को संतोंब मदाल्माओं की शहादत के अनुसार विश्वास्न चाहिए ओर इस व ज्ञान प्राप्त करना शनुष्य को खुद अपने आप अनुभव आन्तरिक आंख यानी इसका अपनी मार्ग भी हैमें औोनों आखाोँ क पीछे जीवाल्मा बैठी " अनुभव  प्राप्त  करने को ব্রা में दोनों जीवात्मा शरीर तीसरी आंख, अथवा दिव्य की आंख खोलें मनुष्य 31 , आन्तरिक उसमें एक आंख है उसी को का जिक्र सभी है। उस आंख সকলী जी महाराज ने लिखा है कि॰ खोली G कहते वह आंख ೯ महात्माओं गोस्वामी किया है। रामायण में भी॰ जोती, श्री गुरु पद नख मणि गण எளிப fa और अन्त से आदि दृष्टि fa सुमिरत तक से अन्त आदि गया है। आप जो सन्त सतगुरु कहा पूरे गुरु की तलाश करें को ही কা স্াল रखता है। ऐसे महापुरुष सृष्टि का रहस्य क्या है ? स्वामी जी गूढ़ भेदों को संसार की सत्ता को समझना चाहते हैं तो इसके 4 हम समझ सकते। ऐसा करने से इसके नतीजों के गलत के द्वारा नहीं तर्क की संभावना होती है। संसार के आदि और अन्त का निर्णय वैज्ञानिक नर्हीं सकते हैं कि सृष्टि कैसे बनाई गई, क्यों बनाई गई, संसार  केर सकते, नवे बता पर निर्भर रहने से fa बल बुराइयां क्यों हैं और कहां से आई করতল সাং লক ম बुद्धि, विचार जा सकता हे। परमात्मा 8 எ का सच्चा ज्ञान मालिक मंजिलें तय करके परे एक ऐसा भी मार्ग है जिस पर चलकर हम ऊंची सृष्टिकर्ता का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैर का॰ इस योनियों का चक्र, कर्मों का कानून चौरासी लाख सृष्टि आत्मा, परमात्मा , बातें हैं जिन पर एक बार तो का जीवन आदि ऐसी गूढ़ जन्म मरण কহলা ৪ী পউযা | क बाद गनुष्य को संतोंब मदाल्माओं की शहादत के अनुसार विश्वास्न चाहिए ओर इस व ज्ञान प्राप्त करना शनुष्य को खुद अपने आप अनुभव आन्तरिक आंख यानी इसका अपनी मार्ग भी हैमें औोनों आखाोँ क पीछे जीवाल्मा बैठी " अनुभव  प्राप्त  करने को ব্রা में दोनों जीवात्मा शरीर तीसरी आंख, अथवा दिव्य की आंख खोलें मनुष्य 31 , आन्तरिक उसमें एक आंख है उसी को का जिक्र सभी है। उस आंख সকলী जी महाराज ने लिखा है कि॰ खोली G कहते वह आंख ೯ महात्माओं गोस्वामी किया है। रामायण में भी॰ जोती, श्री गुरु पद नख मणि गण எளிப fa और अन्त से आदि दृष्टि fa सुमिरत तक से अन्त आदि गया है। आप जो सन्त सतगुरु कहा पूरे गुरु की तलाश करें को ही কা স্াল रखता है। ऐसे महापुरुष - ShareChat