ऑनलाइन क्लास भी नहीं, छुट्टियाँ भी एक्सटेंड… फिर टीचर्स स्कूल क्यों?
आज एक बड़ा सवाल मन में उठता है —
जब ऑनलाइन क्लास भी नहीं चल रही,
जब छुट्टियाँ जनवरी तक बढ़ा दी गई हैं,
तो फिर टीचर्स को रोज़ स्कूल बुलाने की ज़रूरत क्या है?
क्या टीचर्स वहाँ जाकर
क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं?
क्या वो फाइलें सजाने,
,files ठीक करने,
या फिर खाली कमरों में कुर्सियाँ गिनने जा रहे हैं?
या फिर बस इसलिए बुलाया जा रहा है
क्योंकि “टीचर को खाली नहीं बैठने देना चाहिए”?
अगर न बच्चे हैं,
न पढ़ाई हो रही है,
न ऑनलाइन क्लास —
तो फिर शिक्षक वहाँ जाकर क्या करें?
क्या शिक्षक सिर्फ टाइम पास करने की मशीन हैं?
या फिर उन्हें ये साबित करना होता है
कि वे हर हाल में ड्यूटी पर मौजूद हैं,
चाहे काम हो या न हो?
सच तो ये है कि
कई जगहों पर टीचर्स को बेवजह बुलाया जा रहा है,
ना कोई प्लान,
ना कोई उद्देश्य,
बस हाज़िरी पूरी करनी है।
क्या टीचर इंसान नहीं होते?
क्या उन्हें आराम, परिवार या मानसिक शांति की ज़रूरत नहीं होती?
जब छुट्टियाँ दी ही गई हैं,
तो फिर ये आधी-अधूरी व्यवस्था क्यों?
या तो पढ़ाई कराइए,
या फिर साफ़-साफ़ छुट्टी दीजिए।
क्योंकि ऐसे बुलाना
ना शिक्षा है,
ना सम्मान।
अब वक़्त है सोचने का —
टीचर मशीन नहीं, इंसान हैं।
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