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#दिल कि बातें ... दिल कि कलम से #अल्फ़ाज़ दिल के #🌟🌟दिल के अल्फाज ❤️💫📝 #✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️
दिल कि बातें ... दिल कि कलम से - दिल की बंजर धरती को अब जलने दीजीये। है कड़वा मंज़र टलने दीजीये। वक़्त का वो जो अच्छे  ख़्वाब देखे थे कभी मिलकर, रेत के वोघर थे आखिर गलने दीजीये। आप चलती हैं तो दिल में शोर मचता है, अपनी छागल को भी तो कुछ कहने दीजीये। शौक़ से खोलीये दरिया लिये   राहें چ कश्ती कागज़ की है मेरी, गलने दीजीये। अपनी ही नज़र में गिरना है आखिर, मुझको अपनी बाहों में दीजीये। ये सपने पलने ज़िद्द क्यूँ  करना फिर   दोहराएँगे, वफ़ा अब राख़ में ही मिलने दीजीये। राख़ को बिखरी हैं कोई आफ़त नहीं है ये, ज़ुल्फ़ें ढलने दीजीये। शाम ढलती तो साये 8 बातें नज़रों से हुईं और आप चुप सी हैं ? ಪತ सामने   बैठी तो बहने   दीजीये। 8e/ ७०8 दिल की बंजर धरती को अब जलने दीजीये। है कड़वा मंज़र टलने दीजीये। वक़्त का वो जो अच्छे  ख़्वाब देखे थे कभी मिलकर, रेत के वोघर थे आखिर गलने दीजीये। आप चलती हैं तो दिल में शोर मचता है, अपनी छागल को भी तो कुछ कहने दीजीये। शौक़ से खोलीये दरिया लिये   राहें چ कश्ती कागज़ की है मेरी, गलने दीजीये। अपनी ही नज़र में गिरना है आखिर, मुझको अपनी बाहों में दीजीये। ये सपने पलने ज़िद्द क्यूँ  करना फिर   दोहराएँगे, वफ़ा अब राख़ में ही मिलने दीजीये। राख़ को बिखरी हैं कोई आफ़त नहीं है ये, ज़ुल्फ़ें ढलने दीजीये। शाम ढलती तो साये 8 बातें नज़रों से हुईं और आप चुप सी हैं ? ಪತ सामने   बैठी तो बहने   दीजीये। 8e/ ७०8 - ShareChat