कम उम्र से ही कई लड़कियों की पहचान उनके लिए तय कर दी जाती है—उम्मीदों, भूमिकाओं और धारणाओं के ज़रिये—ठीक उसी वक्त जब वे खुद को समझना शुरू ही करती हैं।
यहीं शिक्षा एक बड़ा बदलाव लाती है। यह लड़कियों को सवाल करने, चीज़ें समझने और तयशुदा दायरों से आगे खुद को देखने की जगह देती है।
अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (ई.सी.ई) और इंटीग्रेटेड अप्रोच टू टेक्नोलॉजी इन एजुकेशन (आई.टी.ई) जैसी पहलों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स बचपन से लेकर किशोरावस्था तक सीखने की पूरी यात्रा को मज़बूत बनाने पर काम करते हैं—ताकि लड़कियाँ अलग तरह से सोच सकें, बेहतर सीख सकें और सीखने का अनुभव उनके लिए मायने रखे। मेनस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर समझ बढ़ाकर और पीरियड्स को सेहत का एक सामान्य संकेत मानने वाली बातचीत को आगे बढ़ाकर, ट्रस्ट्स लड़कियों को खुद को समझने, स्वीकार करने और अपनी पहचान पर भरोसा करने में मदद करते हैं।
इन्हीं कोशिशों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स ऐसे माहौल बना रहे हैं जहाँ लड़कियाँ बिना किसी पूर्वाग्रह के, अपनी पहचान खुद गढ़ना सीख सकें।
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