पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।
उन्होंने भारतीय चिंतन को राजनीति की धारा से जोड़ा और “एकात्म मानववाद” के माध्यम से विकास को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों से संपृक्त करने का मार्ग दिखाया। उनका ‘अंत्योदय’ का मंत्र समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक अवसर और सम्मान पहुँचाना आज भी हमारी नीतियों की आत्मा है।
उनका जीवन सादगी, सिद्धांत और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा। उन्होंने हमें सिखाया कि शासन का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि सेवा है; और प्रगति का अर्थ केवल वृद्धि नहीं, बल्कि समावेश है।
उनकी पावन स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।
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