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#🥀🥀🥀हकीकत जिंदगी की🥀🥀🥀
🥀🥀🥀हकीकत जिंदगी की🥀🥀🥀 - गहरी बात मैने देखा कमरे की छत पर एक छिपकली उल्टी लटकी थी। पूछा : क्या बात है, छत से ತಣಿಘ೯ ೯? ೩೫೯ : नीचे क्यों नहीं आती ? छिपकली इस छत को मैंने संभाल रखा है। अगर मैं यहाँ से हट गई तो यह छत नीचे गिर जायेगी। वह छिपकली और कोई नहीं; 'मैं है। हम भी तो इसी भ्रम में जी रहे है कि इस घर गृहस्थी को मैंने संभाल 8 57# रखा है। अगर मैं ना रहा तो सब जायेगा। याद रखें : किसी के 'गुजर' किसी का 'गुजारा' नहीं रुकता गहरी बात मैने देखा कमरे की छत पर एक छिपकली उल्टी लटकी थी। पूछा : क्या बात है, छत से ತಣಿಘ೯ ೯? ೩೫೯ : नीचे क्यों नहीं आती ? छिपकली इस छत को मैंने संभाल रखा है। अगर मैं यहाँ से हट गई तो यह छत नीचे गिर जायेगी। वह छिपकली और कोई नहीं; 'मैं है। हम भी तो इसी भ्रम में जी रहे है कि इस घर गृहस्थी को मैंने संभाल 8 57# रखा है। अगर मैं ना रहा तो सब जायेगा। याद रखें : किसी के 'गुजर' किसी का 'गुजारा' नहीं रुकता - ShareChat