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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - মাঁkন खोल ली थी खिड़कीयॉ हमने रेलगाड़ी में जब कल रात आया था शहर तुम्हारा . মাঁkন खोल ली थी खिड़कीयॉ हमने रेलगाड़ी में जब कल रात आया था शहर तुम्हारा . - ShareChat