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#EK KHWAB SA
EK KHWAB SA - सफर बहुत छोटा है ? मै ट्रेन के डिब्बे में चढ़ा ही था। कि जल्दबाजी में मेरा बैग सीट पर बैठी एक महिला से टकरा गया। धक्के से वह एक तरफ लुढ़क गई। मैंने माफी मांगी। जवाब मैंने पूछा  मे वह मुस्करा कर रह गई। मैडम आप गु़स्सा होने की बजाय मुस्करा रही हो? वह फिर से मुस्कराकर बोली गु़स्सा करके क्यों दिमाग खराब करना भाई साहब। हमारे साथ का सफ़र बहुत छोटा है। मै अगले स्टेशन पर उतर जाऊंगी। फिर सब कुछ भूल जाऊंगी। महिला अगले स्टेशन पर उत्तर कानों में गूंजते रहे " सफ़र गर्ई मगर उसके शब्द मेरे हमे यह समझना चाहिए कि इस बहुत छोटा है। संसार में हमारा समय इतना कम है कि बेकार की को माफ़ न करना, असंतोष दूसरों बहस जलन और नकारात्मक भावनाओं में उलझकर हम अपना चैन गवां बैठते हैं। किसी ने दिल तोडा, धोखा दिया, किया, माफ कर दीजिए। नजरंदाज कर अपमान दीजिए क्योंकि " सफर बहुत छोटा है। " द्वेष और जलन को दिल मे जगह मत दीजिए। , क्षमाशील बनिये मुस्कान बांटिये, आनंदपूर्ण जीवन का मजा लीजिए सफर बहुत छोटा है। सफर बहुत छोटा है ? मै ट्रेन के डिब्बे में चढ़ा ही था। कि जल्दबाजी में मेरा बैग सीट पर बैठी एक महिला से टकरा गया। धक्के से वह एक तरफ लुढ़क गई। मैंने माफी मांगी। जवाब मैंने पूछा  मे वह मुस्करा कर रह गई। मैडम आप गु़स्सा होने की बजाय मुस्करा रही हो? वह फिर से मुस्कराकर बोली गु़स्सा करके क्यों दिमाग खराब करना भाई साहब। हमारे साथ का सफ़र बहुत छोटा है। मै अगले स्टेशन पर उतर जाऊंगी। फिर सब कुछ भूल जाऊंगी। महिला अगले स्टेशन पर उत्तर कानों में गूंजते रहे " सफ़र गर्ई मगर उसके शब्द मेरे हमे यह समझना चाहिए कि इस बहुत छोटा है। संसार में हमारा समय इतना कम है कि बेकार की को माफ़ न करना, असंतोष दूसरों बहस जलन और नकारात्मक भावनाओं में उलझकर हम अपना चैन गवां बैठते हैं। किसी ने दिल तोडा, धोखा दिया, किया, माफ कर दीजिए। नजरंदाज कर अपमान दीजिए क्योंकि " सफर बहुत छोटा है। " द्वेष और जलन को दिल मे जगह मत दीजिए। , क्षमाशील बनिये मुस्कान बांटिये, आनंदपूर्ण जीवन का मजा लीजिए सफर बहुत छोटा है। - ShareChat