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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ज्यों निकल कर बादलों की गोद से थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढी सोचने फिर-फिर यही जी में लगी, आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी? देव मेरे भाग्य में क्या है बदा, मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में? या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी , चू पड़ूँगी या कमल के फूल में? बह गयी उस काल एक ऐसी हवा वह समुन्दर ओर आई अनमनी एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला वह उसी में जा पड़ी मोती बनी लोग यों ही हैं झिझकते , सोचते जबकि उनको छोड़ना पडता है घर किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें बूँद लौं कुछ और ही देता है कर ज्यों निकल कर बादलों की गोद से थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढी सोचने फिर-फिर यही जी में लगी, आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी? देव मेरे भाग्य में क्या है बदा, मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में? या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी , चू पड़ूँगी या कमल के फूल में? बह गयी उस काल एक ऐसी हवा वह समुन्दर ओर आई अनमनी एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला वह उसी में जा पड़ी मोती बनी लोग यों ही हैं झिझकते , सोचते जबकि उनको छोड़ना पडता है घर किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें बूँद लौं कुछ और ही देता है कर - ShareChat